Sunday, May 31, 2020

અસ્તિત્વ


વહીની નો પ્રવાહ જો ભળે નહીં સાગર માં તો તેનું અસ્તિત્વ કેટલું?

શુ સાગરમાં વિલીન થઈને મળતું હશે તેને એનું અસ્તિત્વ?


સુગંધ જો રેલમછેલમ ના થાય હવામાં ,તો તેનું અસ્તિત્વ કેટલું?

શુ સુગંધ ને હવાના કણોમાં ખોવાઈને મળતું હશે એનું અસ્તિત્વ?


કિરણ જો સુરજથી થાય વિલગ તો તેનું અસ્તિત્વ કેટલું?

શુ આદિદેવની કૃપા વિશ્વ પર વરસાવવામાં મળતું હશે તેને નું અસ્તિત્વ?


જળનું વાદળથી જો થાય વિચ્છેદન તો તેનું અસ્તિત્વ કેટલું?

ધરા પર ફરી જલધીને મળીને મળતું હશે તેને એનું અસ્તિત્વ?


જેનાથી સમગ્ર સૃષ્ટિ નું અસ્તિત્વ છે કાયમ, એ ધરતી માતાનું અસ્તિત્વ કેટલું?

શુ સમગ્ર જીવોને આધાર આપીને મળતું હશે તેને  એનું અસ્તિત્વ?


લાગણીઓ જો હૃદયથી થાય વિછૂટી તો એનું અસ્તિત્વ કેટલું?

શુ હૃદય ને મુક્તિની હળવાશ  આપવામાં મળતું હશે તેને એનુંં અસ્તિત્વ?


By : Payal Bodar

Saturday, May 30, 2020

જો મને કાન્હા મળે તો


કહેવા માટે કેટલું હોય છે,
છતાં મુક જ્યારે રહેવું પડે,
ત્યારે મારાં શ્યામ જો મને મળે તો,
વાચાળ બની વાણી ને વહેવા દઉં,
જો મને સખા મળે તો,
મારા સઘળા શબ્દોને અર્થ મળી જાય...

જીવનમાં જ્યારે જ્યારે ઠેસ લાગે,
પડતાં આખડતાં જ્યારે સંતુલન ગુમાવાય,
ત્યારે મારાં ગોવિંદ જો મને મળે તો ,
મારાં અસંતુલિત મન ને રાહ મળે,
જો મને સખા મળે તો,
મને સંયમ ધરવાની પ્રેરણા મળી જાય...

જ્યારે હોય હૃદય વ્યાકુળ ને ચિત અશાંત,
લાગણીઓના વહેણમાં જાત વહેતી જતી હોય,
ત્યારે મારાં કાન્હા જો મને મળે તો ,
મારી બધી વ્યગ્રતા સમાપ્ત થઈ જાય,
જો મને સખા મળે તો ,
મારી લાગણીઓના વહેણને થંભાવનારી પાળ મળી જાય...

જ્યારે સહાયની અતિશય જરૂર હોય ને,
હાકલ આપી કોઈને બોલાવાય નહીં,
ત્યારે જો મારાં માધવ મને મળે તો,
મારાં બધાં સંશયોનો અંત આવે,
જો મને સખા મળે તો ,
મારી મનઃસ્થિતિ ને સમજનાર એકમાત્ર મળી જાય...

By : Payal Bodar

Plain Kulcha

Kulcha is an indian bread from north india. It is made using all  purpose flour ( Maida) and served with Chole, Dal Makhani and Gravy Sabzi. here i have described the method of making Kulcha without using yeast or any special cooking requirement. So before i share the  recipe lets see how this flat Indian bread which has an amazing texture and flavor looks like,

kulcha
indian kulcha
chole kulcha

     Process to make kulcha :
      Kneading the Dough is first step and usually done 2 hrs before preparing the Kulcha, for kneading the dough follow the steps given below:
  • Mix all purpose flour (500 Kg), Salt ( 1tsp) ,Sugar (1tsp), backing soda ( 2tsp) in a large bowl and make a well in the center.
  • add 3 tbls curd in the well and 1 tbl oil. now begin to mix the flour with liquids using lukewarm water and knead it for at least 5 minutes. 
  • take a wet clean cotton cloth and cover the soft smooth dough for 2 hrs.
  • After 2 hrs again knead the dough for some time.you can use some oil to make your dough smooth.
  • make small balls and by using fingers flatten the balls at first using palms and fingers and then add black sesame seeds if nigella seeds are not available. i have sprinkled cumin seeds( optional) and chopped coriander too as you can see in photograph. you can also add ajwain seeds. after sprinkling all these ingredients flatten the ball more using rolling pin and rolling board. 
  • heat the tawa and put the kulcha on the tawa. cook it both sides first without using oil and then apply oil or butter and cook it properly. 
  • cook it till you find golden spot on kulcha.
  • serve the hot kulcha with chole or dal makhani.
  • ( Here i have knead the dough using kinley soda water, you can try this ,your kulcha would get super texture.)

कुलचा उत्तर भारत में प्रचलित एक प्रकार की भारतीय रोटी हैं जो की मैदा से बनती हैं। कुलचा आमतौर पर छोले , दाल मखनी या तो ग्रेवी वाली सब्जियों के साथ खाया जाता हैं। यहाँ पर मैंने बहोत ही आसान तरीके से कुलचा बनाने की पद्धति बताई हैं जिसमे हम बिना यीस्ट ही कुलचा बनायेंगे। 
 आइए जाने कैसे बनता हैं कुलचा :
कुलचा बनाने के लिए सबसे पहले हम आटा गूथेंगे, इसके लिए हमें चाहिए होगा :

मैदा ( ५०० ग्राम)
नमक ( १ टीस्पून )
शक्कर ( १ टीस्पून )
बेकिंग सोडा ( २ टीस्पून)
दही ( ३ टेबलस्पून ) 
कुकिंग ऑइल ( १ टेबलस्पून )

कुलचा बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े से बाउल में मैदा को छान ले और उसमे नमक, शक्कर व् बेकिंग सोडा डाल कर अच्छे से मिला लीजिये। इसके बाद बिच में खड़ा बनाके उसमे दही और कुकिंग ऑइल डाल दीजिये , इसके बाद  हलके गरम पानी से  5 मिनट तक आटा गूंथिये। 

मैंने यहाँ पे आटा गूंथने के लिए kinely soda water का उपयोग किया हैं,इससे मेरे कुलचे काफी सॉफ्ट और स्वादिष्ट बने थे, अगर ये ना हो तो आप हल्के गरम पानी से भी आटा गूंथ सकते हैं। 
अब जब कि आटा गूंथ चुका हैं, उसे कम से कम दो घंटे तक गिले कपड़े में लपेटकर रख दीजिए।

दो घंटे के बाद आटे को थोड़ा सा तेल लगाके फिर से गूंथिये। इसके बाद गोले बनाके उसे पहले हाथ व उंगलियों से ही सपाट करे और जब वो पूरी के साइज के हो जाए तब उसपे काले तिल, कटा हुआ धनिया, जीरा, अजवाईन डाले। इनमे से आपको जो चीज़ पंसंद ना हो उसे न डालिये। 

इसके बाद चकला बेलन लेकर पूरा पराठे की साइज़ का कुलचा बना ले जोकी पूरी तरह से सपाट होना चाहिए। कुलचे को ज्यादा पतला न करें। 

जब कुलचा तैयार हो जाता हैं तो इसे गरम तवे पर सेंके। पहले दोनों तरफ बिना तेल या माखन से सेंके ,जब थोड़ा सेंक जाए तो दोनों तरफ तेल या माखन लगाकर तब तक सेंके जब तक सुनहरे बिंदु न दिखने लगे। कुलचे को ऐसे ही पूरी तरह से सेंके।
अब कुलचा तैयार हैं जिसे हम गरम गरम ही छोले या दाल मखनी के साथ खा सकते हैं।

Friday, May 29, 2020

कृष्णाविषादयोग

Krishna



हम उस कृष्णा को जानते हैं जो प्रेम हैं, हास्य हैं, नृत्य हैं ,संगीत हैं, नाटक हैं ,परमानंद हैं, उत्साह हैं लेकिन शायद बहुत ही कम लोग होंगे जो ये देख पाए हैं की इस सदा आनंदित रहने वाले चहेरे के पीछे विषाद रेखाएँ भी मौजूद थी। हालांकि हम कृष्णा की उदासी को नजरअंदाज कर देते हैं। कहते हैं जब भगवान भी सृष्टि पर इंसान के रूप में अवतरित होते हैं तो उन्हें भी इंसानो की भांति सारी भावनाओ को जीना पड़ता हैं, सहन करना पड़ता हैं और इसमें सुख के साथ दुःख देने वाली भावनाए भी शामिल हैं । 

जन्म से कृष्णा ने अपने माता पिता से विरह जिया था,पालनहार के पास कुछ साल रहे ना रहे की कंस को मारने के लिए वृन्दावन,नन्द-जशोदा, राधा को हमेशा के लिए छोड़के अपने जीवन उद्देश्य की प्राप्ति के लिए निकलना पड़ा था। यशोदा माँ को संभालने, सांत्वना देने के लिए खुद कमजोर नहीं दिखाई पड़े थे इसका अर्थ यह नहीं था की उनको दुःख हुआ नहीं था, कर्तव्य के आगे उन्हें उनकी मानवीय भावनाओ को हमेशा त्यागना पड़ा था। जब हम कृष्णाविषाद योग की और नजर करते हैं तब हमें कृष्ण की व्यथा देखने को मिलती हैं ,साथ ही कितनी भी उलझने, दुःख, निराशा, अड़चन और निरंतर युद्ध के बावजूद जीवन जीने की कला को कृष्णा दिखा जाते हैं

जब कृष्ण वृन्दावन छोड़ते हैं तो "श्रीमद भागवत" कहता है की प्रत्येक सबंध क्षणभंगुर होता हैं - अल्पायु होता हैं ,जैसे पवन बादल, धूल, घास के तिनके सबको पहले करीब लाता हैं और फिर एक ही जटके में सबको अलग कर चला जाता हैं ,यही भगवान् इंसानो के साथ करता हैं। जब उनके पिता वसुदेव की मृत्यु होती हैं तो कृष्णा बेहद दुखी हो जाते हैं और विधाता को कोसते हैं ,ये यह दर्शाता हैं की भगवान के लिए भी अपनों की मृत्यु का असहनीय दर्द पचा पाना मुश्किल हो जाता हैं 

जब महाभारत का युध्द समाप्त होता हैं तो माता गांधारी के उद्विग्न मन को शांत करने के लिए खुद ही योजना बनाते हैं और ऐसी परिस्थिति निर्माण कर देते हैं की गांधारी उनको श्राप दे देती हैं, यादवस्थली और कृष्णा की करुण मृत्यु का श्राप देने के तुरंत बाद गांधारी को अपने कटु शब्दों ,भूल का अहसास होता हैं और वो कृष्णा से क्षमा मांगती हैं लेकिन कृष्णा कहते हैं की उन्होंने श्राप देके कोई भूल नहीं हुई हैं, जीवनभर उन्होंने कही माताओ के आशीर्वाद स्वीकार किये है ,तो इस बार वो इस माता गांधारी के श्राप को भी स्वीकार करते हैं। महाभारत के युद्ध में पांडवो की विजय हुई लेकिन कृष्णा कहते हैं की उन्होंने जित की ख़ुशी महसूस की हैं तो कौरवो की मृत्यु की पीड़ा भी भोगी हैं , अभिमन्यु पर हुए वार सहन किये हैं तो दुर्योधन पर हुए प्रहार भी सहन किये हैं ,युद्ध को शांतिदूत बनके और दुर्योधन, कर्ण ,भीष्म पितामह सबको युद्ध के भीषण परिणाम समजा के युद्ध रोकने की चेष्ठा भी की हैं तो महाभारत के बाद हुए घोर विनाश को भी देखा हैंयुद्ध में जित दिलाने का श्रेय भी स्वीकारा हैं तो युद्ध रोकने की क्षमता होने के बावजूद युद्ध ना रोका ये आरोप भी सर पर लिया हैं

कृष्णा ने अपने सम्पूर्ण जीवन में धर्म की स्थापना के लिए कार्य किये, पांडवो की समस्याए हल की ,अपने पुतो व् पौत्रो के लिए युद्ध किये लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव में कृष्णा थक गए यादवो जब मद ,मोह में चूर होके कृष्णा के सारे प्रयास व्यर्थ करने में लग गए तब कृष्णा शांत हो गए व् माता गांधारी के श्राप को सार्थक कर के यादवस्थली को अपने नजरो के सामने होते हुए देखा ,सहन किया और अंत में एक योद्धा ने सामान्य इंसान की भांति मृत्यु को स्वीकार किया। 

कृष्णा जो की एक प्रसिद्ध योद्धा, अप्रतिम राजा , उत्तम राजनीतिज्ञ , न्यायप्रिय सम्माननीय महापुरुष के रूप में सबके सामने थे उसकी वजह से उनको अपने विषाद को अपने भीतर ही दबाना पड़ा था क्युकी जब महान व्यक्ति एक मुकाम हासिल कर लेता है व् सामाजिक स्तर पर इस प्रकार उच्च पद प्राप्त कर लेता हैं तो सेंकडो आँखे उनकी ओर आशा , समस्याओ के समाधान के लिए उठी हुई होती हैं, उनके सुख, शांति के लिए महान व्यक्तिओ को ये विषाद रूपी मेघ अपने ह्रदय में ही समा के रखने पड़ते हैं जो अंदर अंधकार तो फैलाते  हैं लेकिन बरस नहीं पाते 

अंत में इंदिरा संत की एक कविता में कृष्णाविषादयोग को बखूबी दर्शाया गया हैं जिसको निचे प्रस्तुत किया गया हैं 

મારે કેટ્લુ બધુ રડ્વુ'તુ,પણ..
મારી પાંપણની ગાગર યમુના મા ભરાઈ જ નહિ.
મારે કેટ્લુ બધુ હસવુ'તુ પણ,
રાધા ને વશ થયેલો કંકર મારા ગળામાંદટાયો'તો.
મારે કેટલું બધું બોલવું'તું પણ..
પેલી દુષ્ટ મોરલીએ સાત મુખોથી મારા અવાજને શોષી લીધો'તો..
બંને પાંખ પસારીને પંખીની ગતિથી,
મારે આવેગથી ઉડ્વું'તુ પણ,
પગની સોનાની સાંકળીએ મારા પડ્છાયાને જોરથી બાંધી દીધો'
તો.તેથી જ..
તેથી જ તો એની ક્રીડામાં 'કંદૂક'(દડો) થઈને
મેં યમુનાના ધરામાં ડૂબકી દીધી...
પણ...હાય રે દૈવ! ત્યાંપણ કાલિયાએ વેર વાળ્યું.
(ઇંદિરા સંત)

लेख का कुछ भाग जय वसावड़ा के गुजराती आर्टिकल कृष्णविशादयोग से संदर्भित हैं।

 

Thursday, May 28, 2020

उस दिन अकेला मैंने पाया खुद को




उस दिन अकेला मैंने पाया खुद को
शायद मौका मिला मिलने का खुद को।
अपने भीतर सिर्फ "एक मैं" नही थी,
अपने नए नए रूप में पाया खुद को।
जैसे कोई बीते कल में कैद,तो कोई वर्तमान में मुक्त्त,
कोई ढेर उत्साह में चमक रहा,तो कोई मायूसी में लपेटा हुआ,
कोई हँसी मज़ाक से खिला हुआ,तो कोई गम में समेटा हुआ,
कोई आत्मविश्वास में सन ,तो कोई आत्मग्लानि में डुबा हुआ,
कोई जीवनरस से महेका हुआतो कोई शून्य में खोया हुआ,
कोई प्यार से भरा हुआतो कोई नफरत में जलनेवाला,
कोई दृढ़ निश्चय में अडग ,तो कोई निराशा में हारा हुआ,
कोई सजाग उठा हुआतो कोई बेध्यान सोया हुआ,
कोई हर परीक्षा के लिए तैयारतो कोई अधीर डरा हुआ,
कोई धृणा में कमजोर,तो कोई स्नेह से परिपूर्ण,
कोई सबंधो से हारा हुआकोई सबंधो से खुशनसीब,
कोई हठीविरोधी,तो कोई आराम से सहने वाला,
कोई अहँकार में चूरतो कोई समानता में स्थिर,
कोई मोह में मस्त,तो कोई प्रेम में निर्दोष,
कोई ईर्षा से ग्रस्ततो कोई खुद से संतुष्ट,
कोई जीवन के प्रति उदासीन,तो कोई हर क्षण को जीनेवाला,
कोई समय को मान देने वाला,तो कोई समय को व्यर्थ  करनेवाला,
कोई इतने अस्तित्व के बावजूद अस्तित्वहीन,
तो कोई इन सारे अस्तित्व के मेलजोल से स्वीकृत,
उस दिन अकेला मैंने पाया खुद को,
शायद मौका मिला मिलने को खुद को...

By : Payal Bodar

Wednesday, May 27, 2020

Tostada ( Pela)

"Tostada" or "pela" is a mouthwatering dish you can replace with pizza and if you like to experiment with food. It's really easy to make at home without need of special ingredients.
So before I share the recipe ,let's see how this dish look like.

Tostada

Tostada or Pela

Tostada
Tostada


To make tostada you will require the ingredients : 
1. For making tostada base :
  • all purpose flour
  • wheat flour
  • semolina ( suji)
 
Take all these flour in equal quantity add oil ,salt and water and knead the dough. It should be tight to make a base. After kneading you can make tostada base using rolling board and rolling pin.
After making base fry it in oil till it appear light red. Your base is ready. 

2. Tostada paste
To make tostada base take, 
  •  4-5 medium sized boiled potatoes
  •  3 carrots
  •  cabbage 
  •  2 medium sized shimla mirch ( capsicum)
  •  2-3 green chilies
  •  paneer
  •  coriander 
  •  turmeric powder
  •  cumin powder
  •  asafoetida
  •  salt 

Mash the boiled potatoes and add finely chopped carrots, cabbage, capsicum and green chilly.

To make paste ,take 1tbl oil in pan and saute the ingredients written above ,add turmeric powder, asafoetida, salt , cumin powder as per your taste .After that add crushed paneer and coriander.your paste is ready.

Now is the time for toppings
For topping you would require
  •  3-4 tomatoes 
  • 3 onions 
  • 1 capsicum
  • 1 bowl boiled corn  
Chop tomato, onion and capsicum finely and keep it aside.

To make tostada you will require 2 chutneys.
1. Pudina chutney
2. Tamarind chutney.

Process : 

To make tostada take a tostada base. Spread the pudina chutney on base. After that distribute tostada paste evenly on the base. After this add chopped tomato, onion, capsicum, corn as a
topping. Then spread some tamarind chutney over the topping. then after add sev we use in panipuri, and grate the cheese at the top most layer. Your dish is ready to eat. Its a super yummy dish ,give it a try.

 टोस्टडा 

टोस्टेडा जिसे पेला भी कहते हैं एक बहोत ही स्वादिष्ट वानगी हैं जिसे हम घर पे ही मौजूद सामग्री से बना सकते हैं। अगर आप pizza खाके बोर हो गए हैं और कुछ नया बनाने का सोच रहे हो तो जल्दी से टोस्टडा ( पेला) की रैसिपी देखके बना सकते हैं। 

टोस्टेडा बनाने के लिए इन सामग्री की जरूरत होंगी:
1. टोस्टेडा बेस बनाने के लिए :
- गेहू का आँटा
- मैंदा
- सूजी

इन सभी को समान मात्रा में लेकर कड़क आँटा गूंद ले और बोल बनाके चकला बेलन से रोटी( टोस्टेडा बेस) बना ले। बाद में इसे तेल में तल लें जब तक ये थोड़ा लाल कलर का हो जाये। बेस तैयार हैं।

अब बनाते हैं टोस्टेडा पेस्ट :
 इसे बनाने के लिए चाहिए होगा:
- 4 से 5 उबले हुए आलू
- 3 गाजर
- 2 शिमला मिर्च ( कैप्सिकम)
- पता गोभी
- 2-3 हरी मिर्च
- पनीर
- धनिया
- हल्दी
- हींग
- नमक
- जीरा पाउडर

उबले हुए आलू को मेश कर लीजिए और बाकी सब्जी को बारीक़ी से कांट लीजिए। पनीर को भी क्रश कर लीजिए। 
अब कड़ाई में 1tbl तेल लेकर ऊपर लिखी सब सब्जियो को डाल दीजिए व उसमे हल्दी, हींग, नमक, पनीर डालके थोड़ी देर पकाइए। 10-15 मिनट पकने के बाद टोस्टेडा पेस्ट तैयार हो जाएगी।

टोस्टडा बनाने के लिए हम 4 तरह के टॉपिंग्स का उपयोग करेंगे :
1. टमाटर ( 3-4 नंग)
2. प्याज ( 3 नंग )
3. शिमला मिर्च ( 1 नंग) 
4. उबले हुए मकाई के दाने

टमाटर, प्याज ,शिमला मिर्च को अच्छे से कांट ले जिसके साथ तैयार होता हैं टोस्टडा टॉपिंग्स।

इस डिश में हम 2 तरह की चटनी का उपयोग करेंगे जो कि हैं, 
1. पुदीना चटनी : इसे बनाने के लिए चाहिए होगा पुदीना, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन , नमक, निम्बू। इन सभी सामग्रियो को मिक्सचर में डाल के पुदीना चटनी तैयार हो जाएगी।
2. खजूर इमली की चटनी 

टोस्टेडा बनाने की रीत : 
 सबसे पहले टोस्टडा बेस ले लीजिए। इसके ऊपर पुदीना की चटनी स्प्रेड कर दीजिए। इसके ऊपर टोस्टेडा पेस्ट से एक लेयर बना दीजिए जिसके ऊपर टमाटर, प्याज, शिमला मिर्च व मकाई के दाने की परत कर दीजिए। इसके बाद इमली की चटनी दाल दीजिए। उसके ऊपर सेव जोकि हम पानीपुरी में उपयोग करते हैं उसे डाल दीजिए और सबसे ऊपर चीज़ ग्रेट करके डाल दीजिए। बस इसके साथ ही तैयार हो जाता हैं टोस्टेडा। इस बेहद स्वादिष्ठ वानगी को घर पर एक बार जरूर बनाइए। 


Ephemeral life

We know life is ephemeral, it's a journey towards the death. we have a limited time, we know nothing is gonna remain permanent but we st...